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COVID-19 के प्रकोप के कारण, जनगणना 2021 और एनपीआर का अपडेशन स्थगित

केन्द्र सरकार ने COVID-19 के प्रकोप के कारण, जनगणना 2021 का प्रथम चरण और एनपीआर अपडेशन का कार्य स्थगित कर दिया है। जनगणना 2021 दो चरणों में की जानी थी:
i) प्रथम चरण: मकान सूचीकरण और मकान गणना-अप्रैल से सितंबर, 2020
ii) दूसरा चरण: जनसंख्या गणना-9 फरवरी से 28 फरवरी, 2021
जनगणना 2021 के प्रथम चरण के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register- NPR) का अपडेशन असम के अतिरिक्त सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी प्रस्तावित था ।
उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 24 दिसंबर, 2019 को भारत की जनगणना 2021 की प्रक्रिया शुरू करने एवं राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की मंज़ूरी दे दी थी। इसके तहत पूरे देश में जनगणना का कार्य दो चरणों में संपन्न किया जाएगा।
16वीं जनगणना 2021
जनगणना देश में नागरिकों के लिये योजना बनाने हेतु आधार प्रदान करती है। वर्ष 2021 की जनगणना देश की 16वीं और स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना होगी। भारत की जनगणना प्रकिया विश्व में अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजना है।
जनगणना 2021 की थीम “जन भागीदारी से जनकल्याण” है।
भारत में जनगणना का इतिहास:
भारत में वर्ष 1872 में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत लाॅर्ड मेयो के कार्यकाल में पहली बार देशव्यापी जनगणना कराई गई।  लार्ड रिपन के समय 1881 में पहली बार जनगणना के लिये अलग विभाग बनाया गया और इसे प्रत्येक 10 साल में नियमित रुप से कराना निश्चित किया गया।
इसकी ज़िम्मेदारी सेंसस कमिश्नर को सौंपी गई, भारत में यह पद 1941 तक रहा।
वर्ष 1949 में इस पद का नाम बदलकर रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर कर दिया गया।
मई 1949 में भारत सरकार ने इस विभाग को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कर दिया तब से यह विभाग प्रत्येक 10 साल पर जनगणना करवाता है।
वर्ष 1872 की जनगणना सहित अब तक 15 जनगणनाएँ हो चुकी हैं।

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