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भारत की पहली COVID-19 वैक्सीन

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्र सरकार ने भारत बायोटेक द्वारा तैयार की जा रही भारत की पहली COVID-19 वैक्सीन ‘कोवाक्सिन’ (COVAXIN) को क्लीनिकल ट्रायल की स्वीकृति दे दी है। अब शीघ्र ही इसका इंसानों पर ट्रायल शुरू हो जाएगा।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारत में तैयार की जा रही यह कोविड-19 की पहली वैक्सीन है जिसे क्लीनिकल ट्रायल करने की स्वीकृति मिली है।
  • दवा नियामक सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस स्वदेशी वैक्सीन के फेज-1 और फेज-2 को मानव क्लीनिकल परीक्षण की मंजूरी दे दी है।
  • भारत बायोटेक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे के सहयोग से वैक्सीन बनाने में जुटा हुआ है।

क्या होती है वैक्सीन?

  • वैक्सीन (vaccine) या टीका मानव शरीर में एंटीबॉडिज़ का निर्माण करने में कारगर होते हैं। ये मानव शरीर को बीमारी से लड़ने के काबिल बनाते हैं बिना इसे संक्रमित किए।
  • अगर वैक्सीन लगा हुआ व्यक्ति उस संबंधित बीमारी के संपर्क में आता है तो उसका इम्यून सिस्टम इसे पहचान लेता है और तुरंत एंटीबॉडिज़ रिलीज करता है। ये एंटीबॉडिज बीमारी से लड़कर उसे खत्म कर देते हैं।

कैसे काम करती है वैक्सीन ?

  • जब किसी विशेष रोग से बचाव की वैक्सीन शरीर में प्रवेश करती है तो शरीर को आभास होता है कि वास्तव में इस बीमारी के वायरस ने हमला किया है और इस तरह शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र एंटीबॉडीज़ का निर्माण करता है और जब भविष्य में इस बीमारी का वास्तविक हमला होता है तो शरीर में इसके एंटीबॉडीज़ पहले से ही होते हैं।
  • नए पैदा हुए बच्चे पहले से ही कई बीमारियों से सुरक्षित होते हैं। ऐसा बच्चों में मां के द्वारा मिले एंडीबॉडिज़ की वजह से होता है। इसे पैसिव इम्यूनिटी कहते हैं। पैसिव इम्यूनिटी सामान्यतौर पर कुछ ही हफ्ते या महीनों में असरकारी होती है।

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