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कोरोनावायरस महामारी के कारण COP-26 भी स्थगित

इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रही है। अब तक 46 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और 9 लाख से ज्यादा कोरोना मरीज हैं। दुनिया का अधिकांश हिस्सा लॉकडाउन में है और यातायात के लगभग हर साधन बंद हैं। इस महामारी का असर वैश्विक संस्था संयुक्त राष्ट्र (United Nations) पर भी देखा जा रहा है।  COVID-19 महामारी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (UNFCCC) ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में प्रस्तावित सीओपी 26 (Conference of Parties, COP 26) क्लाइमेट चेंज समिट को स्थगित कर दिया है।
2021 में होगा COP 26
स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में इस साल नवंबर में सीओपी 26 क्लाइमेट चेंज समिट का आयोजन होना था। 10 दिन तक चलने वाले इस समिट में 200 देशों के तकरीबन 30 हजार लोग भाग लेने वाले थे। इस समिट में दिनों दिन बढ़ते वैश्विक तापमान पर चर्चा होनी थी और इसके उपाय पर मंथन होना था ।
क्या है UNFCCC और COP?
UNFCCC वर्ष 1992 में ब्राज़ील में आयोजित ‘रिओ अर्थ समिट’ (Rio Earth Summit) में पर्यावरण पर प्रस्तावित तीन समझौतों में से एक है। ये तीन समझौते हैं-

  • संयुक्त राष्ट्र जैव विविधिता सम्मलेन (UNCBD)
  • संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन (UNCCD)
  • संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (UNFCCC)

विभिन्न देशों द्वारा UNFCCC समझौते पर हस्ताक्षर के पश्चात् 21 मार्च, 1994 को इसे लागू किया गया। इस संधि पर 197 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं।
इस सम्मेलन में आधिकारिक रूप से हिस्सा लेने वाले देशों की बैठक को कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP) के नाम से जाना जाता है।  COP की पहली बैठक मार्च, 1995 को जर्मनी के बर्लिन में आयोजित की गई थी।
इसके तहत ही वर्ष 1997 में बहुचर्चित क्योटो समझौता (Kyoto Protocol) हुआ और विकसित देशों (एनेक्स-1 में शामिल देश) द्वारा ग्रीनहाउस गैसों को नियंत्रित करने के लिये लक्ष्य तय किया गया। क्योटो प्रोटोकॉल के तहत 40 औद्योगिक देशों को अलग सूची एनेक्स-1 में रखा गया है।
इसकी नवीनतन बैठक यानी COP-25 का आयोजन दिसंबर 2019 में स्पेन की राजधानी मैड्रिड में किया गया था।

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