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चीन ने रोका मेकांग नदी का पानी

कोरोना महासंकट के बीच इस महामारी का गढ़ रहे चीन ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में बहने वाली मेकांग नदी में पानी का बहाव बहुत कम कर दिया है। इससे चार देशों थाइलैंड, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम में भीषण सूखा पड़ गया है। इन देशों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि किसानों और मछुआरों को प्रदर्शन करना पड़ा है।
न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार इस फरवरी 2020 के अंतिम दिनों में चीन जब कोरोना से जूझ रहा था, उस समय उसके विदेश मंत्री को अचानक लाओस जाना पड़ा था। दरअसल, दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की जीवनधारा कही जाने वाली मेकांग नदी में पानी कम होने के बाद लाओस के किसानों और मछुआरों ने जोरदार प्रदर्शन किया था।

दक्षिण पूर्व एशिया की ‘गंगा’ है मेकांग
मेकांग एक ऐसी नदी है जो एशिया के छः देशों से बहकर जाती है और इस पर करीब 10 करोड़ लोग निर्भर हैं।हर साल इस नदी से 13 लाख टन मछलियाँ पकड़ी जाती है। यह नदी 4,350 किलोमीटर का सफर तय करती है, इसलिए इसे दक्षिण-पूर्वी एशिया की सबसे लंबी नदी कहा जाता है।
मेकांग अपना आधा सफर चीन देश में ही तय कर लेती है, जहाँ वह ‘लान्टसान्ग’ नाम से जानी जाती है। चीन से निकलने के बाद, यह नदी म्यानमार और लाओस की सीमा बनकर उन्हें अलग करती है और काफी हद तक लाओस और थाईलैंड की भी सीमा ठहरती है। कम्बोडिया में यह नदी, दो उपनदियों में बँट जाती है और जब ये उपनदियाँ वियतनाम में बहती हैं, तो और भी छोटी-छोटी धाराएँ बनकर दक्षिण चीन सागर से जा मिलती हैं।
लाओस की राजधानी, विएंशिएन और कम्बोडिया की राजधानी, नाम पेन दोनों इसी नदी पर बसे बंदरगाह शहर हैं। नदी के मुहाने के पास मेकांग, वियतनाम के लोगों के लिए भी बहुत अहमियत रखती है। वहाँ मेकांग सात धाराओं में अलग हो जाती है और 25,000 वर्ग किलोमीटर तक फैला एक डेल्टा बनाती है। अनुमान लगाया जाता है कि ये धाराएँ कुल मिलाकर 3,200 किलोमीटर लंबी हैं। पानी की कोई कमी न होने की वजह से इसके आस-पास के मैदानों और धान के खेतों की अच्छी सिंचाई होती है और उन्हें बेशकीमती बालू-मिट्टी भी मिलती है। इससे किसान हर साल तीन बार चावल की फसल उगा पाते हैं।
भारत में जो स्‍थान गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी का है, वही दक्षिण पूर्व एशिया में मेकांग नदी का है। इस नदी पर करोड़ों लोगों की आजीविका निर्भर है। ये लोग खेती और मछली पकड़ने के लिए मेकांग नदी के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन चीन में बड़े पैमाने पर बांध बन जाने की वजह से यह नदी सूखती जा रही है। इस नदी पर मछली पकड़ने के लिए निर्भर लोगों का कहना है कि पानी की लगातार कमी हो रही है। कभी-कभी लगातार सूखा पड़ रहा है और कभी अचानक से बाढ़ आ जा रही है। इससे किसानों की मुश्किल बहुत बढ़ गई है।चीन का मेकांग के ऊपरी धारा पर नियंत्रण है। इसी धारा से मेकांग नदी की निचली धारा में सूखे के दिनों में करीब 70 फीसदी पानी आता है।
चीन ने ब्रह्मपुत्र पर भी बनाया विशाल बांध
चीन ने कुछ साल पहले ही तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना सबसे बड़ा बांध चालू था। इस परियोजना से जल आपूर्ति में बाधा पड़ने को लेकर भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। चीन की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना का नाम ‘जम हाइड्रोपावर स्टेशन’ है। इससे डेढ़ अरब डॉलर की लागत से इसे बनाया गया है। शन्नान प्रिफेक्चर के ग्यासा काउंटी में स्थित ‘जम हाइड्रो पावर स्टेशन’ को ‘जांगमू हाइड्रोपावर स्टेशन’ के नाम से भी जाना जाता है। यह ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का इस्तेमाल करता है। ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में यारलुंग जांगबो नदी के नाम से जाना जाता है। यह नदी तिब्बत से भारत आती है और फिर वहां से बांग्लादेश जाती है।

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