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'ब्लैक लाइव्स मैटर' आंदोलन यूरोप में भी फैला

अमेरिका के मिनिपोलिस में अफ्रीकी-अमरीकी व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत ने यूरोप में भी नस्लभेद के खिलाफ आंदोलन चल रहा है।
जॉर्ज फ्लायड की मौत उस समय हो गई थी जब एक अमेरिकी पुलिस अधिकारी उनकी गरदन पर नौ मिनट तक घुटने टेक कर बैठा रहा।
जहां अमेरिका में जॉर्ज फ्लायड की इस त्रासद मौत के बाद ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ (Black Lives Matter) बैनर तले विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं  फ्रांस की राजधानी पेरिस के प्लेस डे ला रिपब्लिक में करीब  “न्याय नहीं तो शांति नहीं” के नारे लगाते देखे गए। ये विरोध प्रदर्शन “जस्टिस फ़ॉर अडामा” नाम के बैनर तले आयेजित किए गए थे। अडामा त्राओर एक युवा काले नागरिक थे जिनकी मौत साल 2016 में फ्रांसीसी पुलिस की कस्टडी में हो गई थी।
 29 मई 2020 से हिंसक प्रदर्शनों का दौर जारी
अमेरिका के मिनेपॉलिस शहर में अश्वेत अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से शुरू हुए हिंसक प्रदर्शन देश के 30 शहरों तक पहुंच गए हैं। अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत का वीडियो वायरल होने के बाद से ही अमेरिका के कई शहरों में 29 मई 2020 से हिंसक प्रदर्शनों का दौर जारी है। प्रदर्शनकारी हाथों में ‘I can’t breathe’ यानी ‘मुझे सांस नहीं आ रही है लिखे हुए प्लेकार्ड लहरा रहे हैं। जार्ज फ्लॉयड को एक दुकान में नकली नोट का उपयोग करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिस अधिकारी को घुटने से आठ मिनट तक जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन दबाते हुए देखा गया।मामले में श्वेत अधिकारी डेरेक चाउविन को गिरफ्तार कर लिया गया तथा उस पर थर्ड डिग्री हत्या और मानव वध का आरोप लगाया गया हैल लेकिन प्रदर्शनकारियों का आक्रोश शांत नहीं हो रहा।

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