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BeiDou: चीन की नेवीगेशन प्रणाली

चर्चा में क्यों?

  • 23 जून 2020 को चीन ने अपने ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम BeiDou-3 के अंतिम सैटेलाइट को  लॉन्च कर दिया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • यह चीनी जीपीएस BeiDou का तीसरा संस्करण है। इसका पहला संस्करण, “बिग डिपर,” 2012 में कमीशन किया गया था।
  • चीन का जीपीएस BeiDou 35 सैटेलाइट से मिलकर बना है। इसके अंतिम सैटेलाइट को 16 जून को लॉन्च किया जाना था, लेकिन लॉन्ग मॉर्च 3बी रॉकेट में आई तकनीकी दिक्कत के कारण इसे टाल दिया गया था।
  • चीन ने BeiDou को साल 2000 में लॉन्च किया था। तब यह प्रणाली केवल चीन में ही सैटेलाइट नेविगेशन की सुविधा प्रदान करती थी। लेकिन, 2012 में चीन ने इसका विस्तार एशिया प्रशांत क्षेत्र में जीपीएस सर्विस देने के लिए कर लिया।
  • अब जबकि इस प्रणाली का आखिरी सैटेलाइट लॉन्च हो गया है तब चीन को पूरे विश्व में जीपीएस की वैश्विक कवरेज मिल सकेगी।
  • BeiDou के एक्टिव होने से चीन को अमेरिकी जीपीएस के उपयोग की जरुरत नहीं होगी। यह चीनी जीपीएस स्मार्टफोन, ड्राइवरलेस कारों, विमानों और जहाजों को भी सहायता प्रदान करेगा। इतना ही नहीं, यह चीन के महत्वकांक्षी ड्राइवरलेस हाई-स्पीड ट्रेनों का भी मार्गदर्शन करेगा।
  • बेइदो नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (BDS) का रूस के ग्लोनास (GLONASS) और यूरोपीय गैलीलियो सिस्टम (Galileo systems) के साथ-साथ अमेरिका के जीपीएस का विकल्प है।

भारत की नेवीगेशन प्रणाली: नाविक

  • नाविक- NavIC (Navigation in Indian Constellation) आठ उपग्रहों की क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह आधारित भारत की स्वदेशी नेवीगेशन प्रणाली है।
  • इसके माध्यम से स्थानीय स्थिति (Indigenous Positioning) या स्थान आधारित सेवा (Location Based Service- LBS) जैसी सुविधाएँ प्रदान की जा रही है।
  • यह भारतीय उपमहाद्वीप पर 1,500 किलोमीटर के दायरे को कवर करता है।

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