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केन्द्र सरकार ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और पेरासिटामोल के निर्यात पर आंशिक रूप से प्रतिबंध हटाया

केन्द्र सरकार ने दो प्रमुख दवाओं, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) और पेरासिटामोल (Paracetamol) के निर्यात पर आंशिक रूप से प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा की खेप देने का आग्रह किया था। यह दवा कोरोनावायरस के उपचार में कारगर बताई जा रही है। चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी द्वारा पब्लिश किए गए जर्नल के मुताबिक, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेने वाला संक्रमित व्यक्ति कोरोना से ज्यादा समय तक लड़ सकता है।हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इजाद किया गया था। ये दवा मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा इसे जोड़ों के दर्द के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। अमरीका की जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के लुपस सेंटर के मुताबिक ये दवा मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द को कम करती है।
ऐसे काम करती है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन
शोध में सामने आया कि क्लोरोक्वीन मानव शरीर के भीतर कोशिका के ऊपर एक परत बना देता है। इस परत के कारण वायरस मानव कोशिका से जुड़ नहीं पाता है। परिणाम यह होता है कि वायरस को पनपने और कई गुना बढ़ने के लिए कोशिका से जरूरी प्रोटीन नहीं मिल पाता। इस कारण वायरस का प्रभाव सीमित हो जाता है।चूंकि कोविड-19 की कोई निश्चित दवा नहीं है, इसीलिए इससे पीड़ित मरीजों के इलाज के कई दवाओं का एक साथ प्रयोग किया जाने लगा।

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