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वाणिज्यिक खनन के लिए कोयला ब्लॉकों की नीलामी

वाणिज्यिक खनन के लिए कोयला ब्लॉकों की नीलामी
चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 18 जून 2020 को वाणिज्यिक खनन (commercial mining) के लिए कोयला ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत की।
  • यह ‘आत्‍मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत भारत सरकार द्वारा की गई अनेक घोषणाओं की श्रृंखला का एक हिस्सा है।
  • कोयला मंत्रालय ने फिक्की (Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry, FICCI) के सहयोग से इन कोयला खदानों की नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत की है।
  • यह नीलामी कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत की गयी है।

वाणिज्यिक खनन का तात्पर्य क्या है?

  • वाणिज्यिक खनन अनुमति मिलने के बाद अब सरकार की तरफ से नीलामी के माध्यम से खरीदे गए कोयले की खदान का उपयोग निजी क्षेत्र अपनी मर्जी से कर सकेगा। निजी कंपनियां चाहें तो इसका उपयोग खुद करेंगी या फिर दूसरी कंपनियों को भी बेच सकेंगी।
  • इस फैसले का दूसरा अर्थ यह भी हुआ कि कोयला क्षेत्र की सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का एकाधिकार खत्म हो गया है।
  • वर्ष 1973 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कानून बनाकर देश के कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। उसके बाद से सारे कोयला खदान कोल इंडिया लिमिटेड के पास थे। बाद में सरकार ने निजी क्षेत्र को कोयला खदान का आवंटन करना शुरू किया था लेकिन यह इस शर्त पर था कि वह उस कोयले का उपयोग केवल अपने उपयोग के लिए कर सकते थे। अब वाणिज्यिक खनन की अनुमति देकर सरकार ने इस शर्त को हटा दिया है।

क्यों लिया गया यह निर्णय?

  • भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयला भंडार और दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है लेकिन साथ ही भारत कोयले का दूसरा सबसे बड़ा कोयला आयातक देश भी है। इसका कारण कोयले में सरकारी क्षेत्र का एकाधिकार और प्रतिस्पर्धा न होने से क्षमता का उचित दोहन न हो पाना है।
  • अब तक इस सेक्‍टर में प्रतिस्पर्धा एवं पारदर्शिता न होना एक बड़ी समस्या थी। इस वजह से कोयला सेक्‍टर में निवेश का अभाव देखा गया और इसकी दक्षता भी सवालों के घेरे में रही।
  • निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने से कोयला क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और प्रतिस्पर्धा होने से उत्पादन भी बढ़ेगा। इस क्षेत्र में निवेश के साथ रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • अब कोई भी सेक्‍टर अपनी आवश्यकताओं के अनुसार कोयला खरीद सकता है। इन सुधारों से न केवल कोयला सेक्‍टर, बल्कि इस्‍पात, अल्युमीनियम, उर्वरक और सीमेंट जैसे अन्‍य सेक्‍टर भी लाभान्वित होंगे। इतना ही नहीं, यह बिजली उत्पादन बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा।
  • पूर्वी और मध्य भारत को इस सुधार से ज्यादा लाभ मिलेगा। कोयल और खनिज में संपन्न क्षेत्रों में इन सुधारों की वजह से ज्यादा सकारात्मक बदलाव आएगा। इन क्षेत्रों में कोयला ब्लॉकों की नीलामी लाखों रोजगार मुहैया कराएगी।
  • यह राज्य सरकारों की आय में सालाना 20,000 करोड़ रुपये का योगदान करेगा।
  • प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत बनाने के आह्वान के अनुरूप इस नीलामी प्रक्रिया का लक्ष्य देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भरता हासिल करना और औद्योगिक विकास को तेज करना है।
  • इन कोयला खदानों से होने वाला उत्पादन देश के 2025-26 तक अनुमानित कोयला उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत का योगदान करेगा। साथ ही इससे 2.8 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें करीब 70,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 2.10 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

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