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महानदी में मिला प्राचीन जलमग्न मंदिर

ओडिशा से बहने वाली महानदी में एक प्राचीन जलमग्न मंदिर मिला है। 60 फीट ऊंचा यह जलमग्न मंदिर करीब 500 साल पुराना बताया जा रहा है।
इसकी खोज के नयागढ़ जिले के पद्मावती गांव के पास से बहने वाली महानदी नदी में की गई है। स्थानीय लोगों को अनुसार इस मंदिर में भगवान गोपीनाथ (भगवान विष्णु का एक रूप) की प्रतिमाएं थीं।
महानदी द्वारा अपना रास्ता बदलने और उसमें आई बाढ़ के कारण साल 1933 में मूल पद्मावती गांव पूरी तरह से डूब गया। इसी गांव में अब यह जलमग्न मंदिर मिला है।
इस मंदिर की खोज इंडियन नैशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट ऐंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) ने की है। INTACH की ओर से डॉक्यूमेंटेशन ऑफ दी हेरिटेज ऑफ दी महानदी रिवर वैली प्रॉजेक्ट शुरु किया गया है।
महानदी की भौगोलिक स्थिति

  • महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा क्षेत्र सबसे बड़ी नदी है। इस नदी को महानन्दा एवं नीलोत्पला के नाम से भी जाना जाता है।
  • महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित सिहावा नामक पर्वत श्रेणी से होता है।
  • सिहावा से निकलकर राजिम में इसमें पैरी और सोंदुर नदियां मिलती हैं।
    शिवरी नारायण नगर से यह दक्षिण से उत्तर की ओर बहने की बजाय पूर्व दिशा की ओर बहने लगती है।
  • संभलपुर ज़िले में यह ओडिशा में प्रवेश करती है और बलांगीर और कटक होते हुए बंगाल की खाड़ी में जा गिरती है।
  • महानदी के समस्त प्रवाह का सबसे अधिक भाग छत्तीसगढ़ में  है।
  • महानदी के तट पर धमतरी, कांकेर, चारामा, राजिम, चंपारण, आरंग और सिरपुर आदि नगर बसे हुए हैं।
  • पैरी, सोंदुर के अलावा शिवनाथ, हंसदेव, अरपा, जोंक और तेल आदि इसकी सहायक नदियाँ हैं।
  • हीराकुड, रुद्री और गंगरेल जैसे महत्त्वपूर्ण प्रमुख बांधों का भी निर्माण भी महानदी पर हुआ हैं

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