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लॉकडाउन शुरू से हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार

जनता कर्फ्यू और उसके बाद 21 दिनों का लॉकडाउन शुरू होने से सड़कों पर उतरने वाले वाहनों की तादाद में भारी कमी आ गई है। इससे वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण में भारी कमी आई है। देशभर के विभिन्न शहरों में वातावरण में पीएम 2.5 प्रदूषक कण और नाइट्रोजन ऑक्साइड के चलते होने वाले प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आई है।
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPBC) की ओर से प्रतिदिन देश के 104 शहरों के बारे में वायु गुणवत्ता बुलेटिन जारी किया जाता है। 25 मार्च 2020 को केवल दो शहर ऐसे रहे जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के अंक के ऊपर यानी खराब श्रेणी में रहा। ये शहर हैं लखनऊ, और मुजफ्फरपुर।
सीपीसीबी के अनुसार लखनऊ का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 25 अप्रैल को 220 के अंक पर और मुजफ्फरपुर का सूचकांक 275 के अंक पर रहा। उल्लेखनीय है कि 201 से ज्यादा सूचकांक को खराब श्रेणी, जीरो से 50 तक के सूचकांक को अच्छा, 50 से 100 तक के अंक वाले सूचकांक को संतोषजनक और 101 से 200 तक के सूचकांक को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है।
क्या होते हैं PM 2.5 और PM 10 कण?
PM को पर्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) या कण प्रदूषण (particle pollution) भी कहा जाता है, जो कि वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण हैं। हवा में उपस्थित ये कण इतने छोटे होते हैं कि नग्न आंखों से नहीं देख सकते हैं। कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है। कण प्रदूषण में PM 2.5 और PM 10 शामिल हैं जो बहुत खतरनाक होते हैं।
PM 2.5 वायुमंडलीय कण पदार्थ को संदर्भित करता है जिसमें 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास होता है, जो मानव बाल के व्यास के लगभग 3% है। इन्हें प्राय: PM2.5 के रूप में लिखा जाता है, इस श्रेणी में कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से ही पता लगाया जा सकता है।
PM10 वो कण हैं जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर होता है और इन्हें fine particles भी कहा जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम 10 को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर (Respirable Particulate Matter ) भी कहते हैं। इनमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं।
PM10 और 2.5 प्रदूषण धूल, कंस्ट्रक्शन की जगह पर और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ता है।हम आपको बता दें कि हवा में PM2.5 की मात्रा 60 और PM10 की मात्रा 100 होने पर ही हवा को सांस लेने के लिए सुरक्षित माना जाता है।

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