Follow Us On

स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए अध्यादेश

कोरोना वायरस महामारी के दौरान देश में डॉक्टरों और नर्सों पर हमले को देखते हुए सरकार उनकी सुरक्षा के लिए एक अध्यादेश लाई है। इसके लिए केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में 22 अप्रैल 2020 को 123 साल पुराने कानून में बदलाव करने का फैसला किया गया। राष्ट्रति रामनाथ कोविंद ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं इसके साथ ही यह अध्यादेश लागू हो गया है। इस अध्यादेश के तहत स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला संज्ञेय और गैर जमानती अपराध होगा। स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों को अधिकतम 7 साल तक की सजा हो सकती है, साथ ही 50 हजार से 2 लाख के जुर्माने का प्रावधानभी किया गया है। इस अध्यादेश के जरिए महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन किया गया है।
क्या होते हैं संज्ञेय अपराध ?
संज्ञेय और असंज्ञेयअपराध की परिभाषा क्रिमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) की धारा 2 (सी) और 2 (एल) में दी गई है। इस अधिनियम की धारा 2 (सी) कहती है कि ऐसा अपराध जिसमें पुलिस किसी व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है, वह संज्ञेय अपराध कहलाता है। पुलिस के पास संज्ञेय अपराधों में बिना वारंट गिरफ्तार करने के अधिकार है।
संज्ञेय अपराध कौन से हैं : अगर आपको यह जानना है कि संज्ञेय अपराध कौन से हैं तो आपको क्रीमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) का शेड्यूल 1 देखना होगा, जिसमें हत्या, बलात्कार, दहेज़ हत्या, अपहरण, दंगा करना आदि को संज्ञेय अपराध की सूची में रखा गया है। यहां आपको संज्ञेय अपराध की पूरी लिस्ट मिलेगी। इस लिस्ट में गंभीर प्रवृति के अपराध शामिल किए गए हैं।
असंज्ञेय अपराध :
क्रिमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) की धारा 2 (एल) कहती है कि ऐसे अपराध जिनमें पुलिस को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है, वे अपराध असंज्ञेय अपराध कहलाते हैं।
असंज्ञेय अपराध कौन से हैं : असंज्ञेय अपराध को हम कुछ उदाहरणों से समझ सकते हैं। जैसे किसी की धार्मिक भावना को कुछ शब्दों से भड़काना असंज्ञेय अपराध है और भारतीय दंड सहिंता की धारा 298 यह कहती है कि इस अपराध में पुलिस बिना किसी वारंट के गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी। किंतु भारतीय दंड संहिता की धारा 296 यह कहती है कि यदि किसी धार्मिक सभा, प्रार्थना स्थल में किसी तरह की बाधा डाली जाए तो यह संज्ञेय अपराध होगा। इसी तरह भारतीय दंड संहिता की धारा 312 के अनुसार किसी का गर्भपात करवाना असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा झूठे साक्ष्य देना, धोखाधड़ी, मानहानि जैसे अपराध को असंज्ञेय अपराधों की श्रेणी में रखा गया है।
राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति

  • संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति के पास संसद के सत्र में न होने की स्थिति में अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
  • अध्यादेश की शक्ति संसद द्वारा बनाए गए कानून के बराबर ही होती है और यह तत्काल लागू हो जाता है।
  • अध्यादेश के अधिसूचित होने के बाद इसे संसद पुनः बैठक के 6 सप्ताह के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।
  • संसद या तो इस अध्यादेश को पारित कर सकती है या इसे अस्वीकार कर सकती है अन्यथा 6 सप्ताह की अवधि बीत जाने पर अध्यादेश प्रभावहीन हो जाएगा।
  • चूँकि सदन के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतराल 6 महीने का हो सकता है, इसलिये अध्यादेश का अधिकतम 6 महीने और 6 सप्ताह तक लागू रह सकता है। इसके अलावा राष्ट्रपति कभी भी अध्यादेश को वापस ले सकता है।

Related Posts

Leave a Reply