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21 अप्रैल: सिविल सेवा दिवस

प्रतिवर्ष 21 अप्रैल को सिविल सेवा दिवस (Civil Services Day) के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रशासनिक सुधार तथा जन शिकायत विभाग द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस बार COVID-19 के कारण किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया है।  इस दिवस के अवसर पर “सार्वजनिक प्रशासन में प्रधानमंत्री उत्कृष्ठता अवार्ड” तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है। इन अवार्ड की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। इस पुरस्कारों का उद्देश्य केन्द्रीय तथा राज्य सरकारों के सिविल सर्वेन्ट्स द्वारा किये गये बेहतरीन कार्य को सम्मानित करना है।
इसी दिन 1947 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आल इंडिया एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) ट्रेनिंग स्कूल के पहले बैच के प्रोबेशनर्स को पहली बार दिल्ली के मेटकाफ़ हाउस में संबोधित किया था।अपने भाषण में उन्होंने सिविल सेवकों को ‘भारत का स्टील फ्रेम’ कहा था।
सिविल सेवा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • सिविल सेवा (Civil Service) शब्द ब्रिटिश काल में आया था जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के नागरिक कर्मचारी प्रशासनिक नौकरियों में शामिल थे। ब्रिटिश सरकार उन्हें ‘लोक सेवक’ यानी सिविल सर्वेंट कहकर बुलाती है।
  • भारत में लार्ड कार्नवालिसपहला गवर्नर-जनरल (1786-93) था, जिसने भारत में इन सेवाओं को प्रारंभ किया तथा उन्हें संगठित किया।इसीलिए उसे भारस में सिविल सेवा का पिता भी कहा जाता है।
  • वर्ष 1800 में, वैलेजली (गवर्नर-जनरल, 1798-1805) ने प्रशासन के नये अधिकारियों को प्रशिक्षण देने हेतु फोर्ट विलियम कालेज की स्थापना की। वर्ष 1806 में कोर्ट आफ डायरेक्टर्स ने वैलेजली के इस कालेज की मान्यता रद्द कर दी तथा इसके स्थान पर इंग्लैण्ड के हैलीबरी (Haileybury) में नव-नियुक्त अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु ईस्ट इंडिया कॉलेज की स्थापना की गयी। यहां भारत में नियुक्ति से पूर्व इन नवनियुक्त प्रशासनिक सेवकों को दो वर्ष का प्रशिक्षण लेना पडता था।
  •  1833 के चार्टर एक्ट द्वारा कंपनी के पदों हेतु भारतीयों के लिये भी प्रवेश के द्वार खोल दिये गये किंतु वास्तव में कभी भी इस प्रावधान का पालन नहीं किया गया।
  • 1857 के पश्चात, 1858 में साम्राज्ञी विक्टोरिया की घोषणा में यह आश्वासन दिया गया कि सरकार सिविल सेवाओं में नियुक्ति के लिये रंग के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करेगी तथा सभी भारतीय स्वतंत्रतापूर्वक अपनी योग्यतानुसार प्रशासनिक पदों को प्राप्त करने में सक्षम होगे।
  • 1857 में मैकाले समिति की सिफारिशों के आधार पर सिविल सेवाओं में चयन के लिये प्रतियोगी परीक्षा को लागू किया गया।
  • 1863 में, सत्येंद्र नाथ टैगोर ने इंडियन सिविल सर्विस में सफलता पाने वाले प्रथम भारतीय होने का गौरव प्राप्त किया।

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