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पर्याप्त प्रतिनिधित्व जांचे बगैर प्रोन्नति में आरक्षण नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण और परिणामी वरिष्ठता पर 17 अप्रैल को फैसला सुनाते हुए कहा है कि राज्य सरकार पर्याप्त प्रतिनिधित्व जांचे बगैर प्रोन्नति में आरक्षण के साथ परिणामी वरिष्ठता नहीं दे सकती। सुप्रीम कोर्ट ने एम नागराज और जनरैल सिंह के मामले में संविधान पीठ के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रोन्नति में आरक्षण के साथ परिणामी वरिष्ठता देने से पहले पर्याप्त प्रतिनिधित्व जांचना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा प्रशासनिक सर्विस के एससी एसटी अधिकारियों को प्रोन्नति में आरक्षण और परिणामी वरिष्ठता के मामले में यह फैसला सुनाया है।
यह फैसला न्यायमूर्ति मोहन एम शांतनगौडर और आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने उड़ीसा हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगाते हुए दिया है। हाईकोर्ट ने उड़ीसा एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के एससी एसटी अधिकारियों को प्रोन्नति में आरक्षण के साथ परिणामी वरिष्ठता देने का राज्य सरकार का 20 मार्च 2002 का रिज्यूलूशन (निर्देश) रद कर दिया था। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही ओडीशा एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के क्लास वन (जूनियर ब्रांच)अधिकारियों की ग्रेडेशन लिस्ट भी रद कर दी थी। सुप्रीम ने आदेश को सही ठहराते हुए उसमें दखल देने से इन्कार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि 85वें संविधान संशोधन में जुड़े अनुच्छेद 16 (4ए) के मुताबिक अगर राज्य सरकार को लगता है कि एससी एसटी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो राज्य सरकार को अधिकार है कि वह प्रोन्नति में आरक्षण के साथ परिणामी वरिष्ठता के प्रावधान कर सकती है।85वें संविधान संशोधन के तहत सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
क्या है एम नागराज मामला?
2006 में ‘एम नागराज बनाम भारत सरकार’ मामले की सुनवाई करते हुए पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन के मामले में एससी-एसटी वर्गों को संविधान के अनुच्छेद 16 (4) और 16 (4 B) के अंतर्गत आरक्षण दिया जा सकता है। पर आरक्षण के इस प्रावधान में कुछ शर्तें जोड़ते हुए अदालत ने यह भी कहा कि प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए किसी भी सरकार को नीचे लिखे मानदंडों को पूरा करना होगा।
ये मापदंड थे, समुदाय का पिछड़ापन, प्रशासन में उनका अपर्याप्त प्रतिनिधित्व एवं कुल प्रशासनिक कार्यक्षमता । कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि एससी-एसटी वर्गों के लिए प्रमोशन में आरक्षण का प्रावधान करने से पहले सरकार को ये आंकड़े जुटाने होंगे कि ये वर्ग कितने पिछड़े रह गए हैं, प्रतिनिधित्व में इनका कितना अभाव है और प्रशासन के कार्य पर इनका क्या फर्क पड़ेगा।

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