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भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद का 70 वां स्थापना दिवस

9 अप्रैल, 2020 को ‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (Indian Council for Cultural Relations- ICCR) अपना 70वाँ स्थापना दिवस मनाया।हालांकि COVID-19 के कारण अधिकतर कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित किये गए।उल्लेखनीय है कि ICCR  विभिन्न देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम संचालित कर रही है।
                                       भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद

(Indian Council for Cultural Relations- ICCR):
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की स्थापना 9 अप्रैल, 1950 को स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने की थी।

इसके उद्देश्यों में शामिल हैं-
भारत के अन्य देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों से संबंधित नीतियों एवं कार्यक्रमों के निर्माण तथा कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से भाग लेना।
भारत एवं अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों तथा आपसी समझ को बढ़ावा देना।
विभिन्न देशों एवं नागरिकों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से भारत की विदेश नीति को एक सुदृढ़ आधार प्रदान करती है।
इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

साफ्ट पावर को बढ़ाने में योगदान
ICCR अपनी गतिविधियों के माध्यम से भारत की साफ्ट पावर को बढ़ाने में योगदान देता है।अमेरिकी राजनीति विज्ञानी जोसेफ न्ये ने 1990 में जब इस धारणा को लोकप्रिय बनाया था, उससे पहले से ही भारत की सॉफ्ट पॉवर काफी मजबूत है और उसे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में शताब्दियों पूर्व से ही स्वीकृति मिलती रही है। लोगों ने दुनिया की प्रचानीतम सभ्यताओं में शामिल इस देश की कला और संस्कृति के बारे में जाना-समझा है। लेकिन खास तौर पर पिछले दशक के दौरान भारत ने अपनी खास तौर पर पॉवर का ज्यादा व्यवस्थित तरीके से उपयोग करना शुरू किया है ।
भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पेश करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें 2006 में विदेश मंत्रालय के अधीन एक पब्लिक डिप्लोमेसी डिवीजन शुरू करना भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आइसीसीआर) का दुनिया भर में विस्तार, पर्यटन मंत्रालय का ‘अतुल्य भारत अभियान’ और प्रवासी कार्य मंत्रालय के काम-काज भी शामिल है। इन प्रयासों ने न सिर्फ भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू को विदेशों में प्रदर्शित करने में मदद की है, बल्कि देश की अहम विदेश नीति से जुड़े प्रयासों में भी मदद की है।
सॉफ्ट पॉवर: पब्लिक डिप्लोमेसी का एक औजार
सॉफ्ट पॉवर शब्द का उपयोग उस क्षमता के लिए किया जाता है जिससे दूसरों को बिना ताकत या धमकी का इस्तेमाल किए ही कुछ करने के लिए तैयार किया जा सके । पारंपरिक रूप से ‘हार्ड पॉवर’ जहां राज्य के सैन्य और आर्थिक संसाधनों पर निर्भर करती है वहीं सॉफ्ट पॉवर किसी देश के सामने अपने आकर्षण को पेश कर उसको खुद से सहमत करने की कोशिश करता है। यह किसी भी देश के तीन प्रमुख संसाधनों पर निर्भर करता है- संस्कृति, राजनीतिक मूल्य और विदेश नीति।
सॉफ्ट पॉवर मूल रूप से ऐसी चीजों पर निर्भर करता है जिसको मापा नहीं जा सकता। यानी यह दूसरे देश को अपनी अच्छी छवि पेश कर उसकी अपने बारे में सोच को बदलने से जुड़ा है । आज ज्यादातर देश सॉफ्ट पॉवर और हार्ड पॉवर को एक साथ मिला कर इस्तेमाल करते हैं जिसे ‘स्मार्ट पॉवर’ भी कहते हैं। साल 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत ने भी ऐसे ही मिश्रण का इस्तेमाल करना शुरू किया है हालांकि अब भी इसमें सॉफ्ट पॉवर पर ही ज्यादा ध्यान है।
 

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