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1998 OR2 उल्कापिंड धरती के पास से होकर गुजरा

28 अप्रैल 2020 को 1998 OR2 नामक उल्का पिंड पृथ्वी से 60 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजर गया। यह उल्कापिंड हवाईद्वीप समूह पर नीट नामक प्रोग्राम के तहत खोजा गया था। इस उल्‍कापिंड की खोज एस्‍टेरॉयड ट्रैकिंग प्रोग्राम के जरिए की गई थी। चपटी कक्षा वाले इस उल्‍कापिंड की खोज 1998 में हो गई थी। तभी से इस पर शोध जारी है। सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 1344 दिन का समय लग जाता है।
नैनीताल के आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने पहले ही बता दिया था कि इस आकाशीय घटना से डरने की कोई बात नहीं है क्‍योंकि यह उल्‍कापिंड पृथ्‍वी से 60 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा।अब इस तरह का अगला संयोग 2079 में होगा। प्‍यूर्टो रिको के ऑब्‍जर्वेटरी में 8 अप्रैल से इस उल्‍कापिंड की मॉनिटरिंग की जा रही है, इसके अनुसार इसकी रफ्तार 19,461 मील (31,320 km/h) प्रति घंटे की थी।
क्या होते हैं एस्टेरॉयड या उल्कापिंड?
हमारे सौरमंडल में ऐसी लाखों छोटी-बड़ी चट्टाने हैं, जो सूर्य की परिक्रमा करते हुए कई बार पृथ्वी के निकट आ जाती हैं, निकट से गुजर जाती है या उसके वायुमंडल में आकर जलकर टुकड़े-टुकड़े होकर धरती पर गिर जाती हैं। पृथ्वी को अतीत में कई बार इस तरह के पिंडों के साथ टक्कर झेलनी पड़ी है।
सबसे प्रलयंकारी पिंड साढ़े छह करोड़ साल पहले टकराया था। उसने न जाने कितने जीव-जंतुओं की प्रजातियों का पृथ्वी पर से अंत कर दिया। डायनासॉर इस टक्कर से लुप्त होने वाली सबसे प्रसिद्ध प्रजाति हैं। वह लघु ग्रह सैनफ्रांसिस्को की खाड़ी जितना बड़ा था और आज के मेक्सिको में गिरा था। इस टक्कर से जो विस्फोट हुआ, वह दस करोड़ मेगाटन टीएनटी के बराबर था। इससे पृथ्वी पर वर्षों तक अंधेरा छाया रहा।
ऐसे चलता है पता?
अमेरिका की हवाई यूनिवर्सिटी का (ATLAS Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System) एटलस सिस्टम इन आकाशीय पिंडों की पहचान और चेतावनी देता है। ये दूरबीनों का ऐसा सिस्टम है, जिसका मक़सद धरती की तरफ़ आ रहे बड़े-बड़े उल्कापिंडों या क्षुद्र ग्रहों से आगाह करना है। एटलस सिस्टम की स्थापना जॉन टोनरी ने की है, जो एक खगोलविद हैं। जब कोई आकाशीय पिंड  धरती की तरफ़ बढ़ता दिखाई देता है, तो एटलस की दूरबीनें चेतावनी दे देती हैं। इस चेतावनी को एटलस की वेबसाइट पर डाल दिया जाता है।
C/2019 कॉमेट के टूटने की घटना भी की कवर
एटलस सिस्टम ने हाल ही में C/2019 कॉमेट के दर्जनों हिस्सों में टूटने की घटना की भी तस्वीरें ली हैं। ये कॉमेट रोबॉटिक ऐस्ट्रोनॉमिकल सर्वे सिस्टम ने हवाई में दिसंबर 2019 में खोजा था। यह मार्च के मध्य तक बेहद तेज रोशनी का हो गया था और वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि यह दशकों में सबसे चमकीला कॉमेट हो सकता है। हालांकि, आखिरकार यह कई टुकड़ों में बिखर गया।

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